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उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए न्यायों की संक्षिप्त जानकारी

राज्य उपभोक्ता आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक की अपील खारिज़ की

राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक की बच्चू सिंह व अन्य के खिलाफ दाखिल अपील खारिज़ करते हुए जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा जारी 07.01.2011  दिनांकित आदेश को आंशिक संशोधन के साथ बरकरार रखा है, जिसमें अपीलार्थी बैंक को 200000/   रुपए मय 9 फीसदी ब्याज के साथ व परिवाद व्यय तथा मानसिक संताप की क्षतिपूर्ति स्वरूप 25000/ रुपए का भुगतान करने को कहा गया है।

मामले के अनुसार परिवादी ने विपक्षी यानि अपीलार्थी बैंक से दो लाख रुपए की सीसी लिमिट ले रखी है जिस पर बैंक द्वारा स्टाक का बीमा कराया जाता है। दुर्भाग्यवश 10.05.002 को सुबह 9.30 बजे परिवादी की फर्म में आग लग गई और तकरीबन छह लाख रुपए का नुकसान हो गया। अपीलार्थी का कथन था कि आग दुकान पर नहीं लगी बल्कि गोदाम में लगी थी जिसके लिए वह दोषी नहीं है। अत: जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को अपास्त किया जाए।
जबकि प्रत्यर्थी परिवादी का कहना था कि उसने दो लाख रुपए की सीसी लिमिट बैंक से ली थी जिस पर नियमानुसार अपीलार्थी को 300000/  रुपए का बीमा कराना चाहिए था जो बैंक ने नहीं किया अत: परिवादी को हुई क्षति की भरपाई का दायित्व बैंक का है।
न्यायालय ने उपरोक्त दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद निष्कर्ष निकाला कि दिनांक 10.05.2002 को दुर्घटना कारित होने के बाद बैंक ने सेवा में कमी करते हुए दिनांक 13.05.2002 को बीमा करवाया और कवर नोट दिया है। यदि अनुबंध में बीमा करवाने का दायित्व ऋणी पर रखा हो और बैंक बीमा नहीं करवाता है तो बीमा करवाने के संबंध में बैंक की सेवा में कमी नहीं मानी जाएगी किंतु बैंक प्रैकिटस के अनुसार यदि किसी मामले में बैंक से ऋणी के खाते में प्रीमियम की कटौती कर बीमा करा दिया तो फिर बीमा कराने का दायित्व बैंक का होगा। इस मामले में बैंक ने दो बार प्रीमियम कटौती कर बीमा करा दिया तो फिर बीमा का दायित्व बैंक का होगा। न्यायालय ने माना कि बैंक द्वारा बीमा समय पर नहीं करवाने के कारण परिवादी को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति का दायित्व भी बैंक का है।
राज्य आयोग ने तथ्यों व तर्कों के आधार पर अपीलार्थी पंजाब नेशनल बैंक की अपील खारिज कर दी व जिला उपभोक्ता फोरम के 07.01.2011 के आदेश को बरकरार रखते हुए आंशिक रूप से संशोधित करते हुए कहा कि दिनांक 10.05.2002 से अदायगी तक 9 फीसदी वार्षिक दर से 200000/ रुपए ब्याज सहित अदा करेगा, साथ ही परिवाद व्यय व मानसिक संताप की क्षतिपूर्ति स्वरूप 25000/ रुपए का भुगतान भी परिवादी को करेगा।

(अपील संख्या- 264/2011, निर्णय दिनांक- 01.01.2013)

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Ravi Srivastava

लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक मैं श्रीवास्तव विधि व्यवसाय से तकरीबन 16 वर्षों से जुड़े रहे हैं खासकर उपभोक्ता मामलों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आपने अनेक मामलों में गुत्थियों को सुलझाया है, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े रहे हैं सरकारी सहयोग के माध्यम से निवेशकों हेतु जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित किए. अब इस मंच के जरिए दूरदराज बैठे अपने पाठ्कों को उपभोक्ता मामलों से जुड़े न्याय निर्णयन से अवगत कराना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही लक्ष्य है. वकालत के पेशे से जुड़े तमाम लोग इस पुनीत कार्य में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ हैं Mobile- 9696123500 EMail ID- ravi_sriv@rediffmail.com, EMail ID- enquiry@consumerforumonline.in

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