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उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए न्यायों की संक्षिप्त जानकारी

इलाज में लापरवाही पर ‘एस्कार्ट हार्ट इंस्टिट्यूट ऐंड रिसर्च सेंटर (हॉस्पिटल)’ को चुकाने पड़े एक करोड़

देश के जानेमाने और बड़े अस्पताल भी अपने ग्राहकों के साथ हद दर्जे की लापरवाही बरत सकते हैं, इसका एक उदाहरण एस्कार्ट हार्ट इंस्टिट्यूट ऐंड रिसर्च सेंटर (हॉस्पिटल), दिल्ली  में देखने को मिला जब  एक महिला के पैर में खून का प्रवाह रुकने पर उसके दिल का ऑपरेशन किया गया. बावजूद इसके महिला के पैर का दर्द कम होने के बजाय बढ़ता ही गया. तबीयत बिगड़ने पर उनके इलाज के लिए होम्योपैथी का सहारा लिया गया लेकिन हालत नहीं सुधरी और महिला को अपना एक पैर गंवाना पड़ा. इसी बीच वर्ष 2010 में महिला की मौत हो गई.

इस मामले में अब दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टरों द्वारा इलाज के दौरान अपनाए गए तरीके को जानलेवा लापरवाही माना है. आयोग ने उक्त हार्ट इंस्टिट्यूट ऐंड रिसर्च सेंटर (हॉस्पिटल) अस्पताल पर ब्याज सहित एक करोड़ 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इलाज में लापरवाही पर दिल्ली के इस अस्पताल पर लगा यह सबसे
बड़ा जुर्माना है. आयोग ने एक करोड़ 15 लाख रुपये की रकम में से 75 लाख रुपये उपभोक्ता कल्याण फंड में जमा कराने के निर्देश अस्पताल को दिए हैं. जबकि  बारह प्रतिशत ब्याज समेत  20 लाख रुपये मृतक महिला के पति और मामले के शिकायतकर्ता द्वारिका, नई दिल्ली निवासी के०सी० मल्होत्रा को  दिनांक: 22-08-2008 से देने के आदेश दिए गए हैं. इतना ही नहीं, वर्ष 2008 से अब तक इस मुकदमे पर शिकायतकर्ता द्वारा खर्च किए गए 50 हजार रुपये का भुगतान भी अस्पताल को करना होगा.

इस मामले में आयोग ने एक और बात को स्पष्ट किया. दरअसल अस्पताल प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि पीड़ित महिला की मौत हो चुकी है. ऐसे में मुआवजे की मांग अनुचित है. हालांकि आयोग ने साफ किया कि उपभोक्ता के कानूनी वारिस अथवा प्रतिनिधि भी मुआवजा मांगने के हकदार होते हैं. इसलिए इस मामले में पीड़ित महिला के पति की मांग जायज है.

 

वाद संख्या: 191/2008,

K.C.Malhotra Vs Escort Heart Institute.

निस्तारित: 22-04-2016

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Ravi Srivastava

विधि व्यवसाय से तकरीबन 16 वर्षों से जुड़े रहे हैं खासकर उपभोक्ता मामलों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आपने अनेक मामलों में गुत्थियों को सुलझाया है, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े रहे हैं सरकारी सहयोग के माध्यम से निवेशकों हेतु जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित किए. अब इस मंच के जरिए दूरदराज बैठे अपने पाठ्कों को उपभोक्ता मामलों से जुड़े न्याय निर्णयन से अवगत कराना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही लक्ष्य है. वकालत के पेशे से जुड़े तमाम लोग इस पुनीत कार्य में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ हैं EMail ID- ravi_sriv@rediffmail.com, EMail ID- enquiry@consumerforumonline.in

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  1. पीड़ित महिला के पति की मांग जायज है

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