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उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए न्यायों की संक्षिप्त जानकारी

डाक विभाग के खिलाफ पारित क्षतिपूर्ति का आदेश निरस्त

राज्य आयोग, उ0प्र0 ने जिला उपभोक्ता फोरम, फैजाबाद द्वारा डाक विभाग के खिलाफ पारित क्षतिपूर्ति के आदेश को निरस्त कर दिया।

दरअसल पन्ना लाल (परिवादी) ने वर्ष 1997-1998 में प्रबन्धक, उ0प्र0 सहकारी ग्राम्य विकास बैंक, जलालपुर, अम्बेडकर नगर शाखा से 20000 रुपए में दो भैंसें ऋण लेकर खरीदी थीं। जिसमें से एक भैंस जिसकी कीमत रुपए 9500 थी मर गई। परिवादी ने बैंक में सारी कागजी कार्यवाही पूरी करते हुए क्लेम किया। लेकिन बैंक ने क्लेम देने की बजाए उल्टे परिवादी से ऋण वसूली शुरू कर दी। जब परिवादी ने इस प्रकरण की छानबीन शुरू की तो ज्ञात हुआ ओरयण्टल इंश्यौरेंस कम्पनी ने तो पूरा क्लेम बनाकर डाक के जरिए बैंक को पहले ही भेज दिया था किन्तु 04.05.1999 को बीच में ही कहीं डाक का वो थैला गुम हो गया जिसमें उक्त चिट्ठी थी। परिवादी पन्ना लाल ने इसी को आधार बनाकर एक शिकायत जिला उपभोक्ता फोरम में दायर कर दी।

फोरम ने अपने आदे्श में न केवल डाक विभाग और बैंक पर आदेश पर अंकित तिथि से 6 प्रतिशत की दर से 5000 रुपए का जुर्माना लगाया बल्कि इंश्यौरेंस कम्पनी को भी 12 प्रतिशत की दर से 9500 रुपए परिवादी को अदा करने को कहा।

डाक विभाग के गले जिला उपभोक्ता फोरम का ये आदेश नहीं उतरा ओर उसने इसके खिलाफ राज्य आयोग उ0प्र0 में अपील कर दी। डाक विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए अपील में कहा- कि शिकायतकर्ता हमारा उपभोक्ता नहीं है क्योंकि न तो प्रश्नगत डाक उसने भेजी है और न ही वो उसका प्राप्तकर्ता है। उसने भारतीय डाक अधिनियम, 1898 की धारा-6 का हवाला भी दिया जिसके अनुसार-

“6. Exemption from liability for loss, misdelivery, delay or damage The Government shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivery or delay of, or damage to, any postal article in course of transmission by post, except insofar as such liability may in express terms be undertaken by the Central Government as hereinafter provided and no officer of the Post Office shall incur any liability by reason of any such loss, misdelivery, delay or damage, unless he has caused the same fraudulently or

by his willful act or default.”

आयोग ने माना कि परिवादी वाकई में अपीलार्थी का ग्राहक नहीं है, इसके अतिरिक्त धारा-6 (भारतीय डाक अधिनियम) के अन्तर्गत मात्र डाक वितरण न होने के कारण अपीलार्थी क्षतिपूर्ति का अदायगी हेतु उत्तरदायी नहीं माने जा सकते जब तक कि यह प्रमाणित न हो जाए की अपीलार्थी के किसी कर्मचारी के कपटपूर्ण कार्य अथवा किसी लापरवाही के कारण डाक वितरित नहीं हो पायी।

राज्य आयोग ने अपीलार्थी कि खिलाफ पारित आदेश निरस्त कर दिया जबकि बैंक व इंश्यौरेंस कम्पनी ने बताया कि उन्होंने जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश का पालन कर दिया है। इस तरह डाक विभाग के ऊपर आरोपित क्षतिपूर्ति अपास्त हो गई।

 वाद संख्याः A/2007/442

यूनियन आफ इण्डिया बनाम पन्ना लाल

निस्तारितः 02.01.2017

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The Author

Ravi Srivastava

विधि व्यवसाय से तकरीबन 16 वर्षों से जुड़े रहे हैं खासकर उपभोक्ता मामलों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आपने अनेक मामलों में गुत्थियों को सुलझाया है, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े रहे हैं सरकारी सहयोग के माध्यम से निवेशकों हेतु जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित किए. अब इस मंच के जरिए दूरदराज बैठे अपने पाठ्कों को उपभोक्ता मामलों से जुड़े न्याय निर्णयन से अवगत कराना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही लक्ष्य है. वकालत के पेशे से जुड़े तमाम लोग इस पुनीत कार्य में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ हैं EMail ID- ravi_sriv@rediffmail.com, EMail ID- enquiry@consumerforumonline.in

3 Comments

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  1. रजि. डाक गुम होने या गलत व्यक्ति को डिलिवर्ड हो जाने पर उपभोक्ता फोरम हर्जाना दिलाने में धारा 6 पोस्टल एक्ट के संरक्षण से असमर्थ हो जाता है,जबकी उपभोक्ता को हानि उठानी पड़ती है।

    1. लक्ष्मण जी आपका कहना सही है, बहुत सारे ऐसे नियम व कानून बने हुए हैं जो उपभोक्ता हितों के विपरीत हैं, जिन्हें न्यायालयों में चुनौती दी जानी चाहिए. ऐसे लचर कानूनों की वजह से ही विभाग अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाता है.

    2. Sir
      Good after noon
      Kya koi Cellular company apne bill ke bhugtan ke liye kisi ke bill detail ka istemal kar sakti hai kya

      8009631617

      Ravi shankar Chaudhari

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