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उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए न्यायों की संक्षिप्त जानकारी

ब्याज सहित लौटानी पड़ी लैपटाप की कीमत

शिमला के एक दुकानदार द्वारा ग्राहक को लैपटाप न देना भारी पड़ गया, जिसकी कीमत उसे ब्याज सहित पैसे वापसी कर चुकानी पड़ी।

जिला उपभोक्ता फोरम, शिमला में अजय वशिष्ठ जो कपड़े के व्यवसायी हैं ने मेसर्स सीआईएफ कम्प्यूटर्स, शिमला के खिलाफ लैपटाप न देने की शिकायत दर्ज करायी जबकि लैपटाप का मूल्य चुकाया जा चुका था। जिला उपभोक्ता फोरम ने परिवादी अजय वशिष्ठ के पक्ष में फैसला देते हुए कहा विपक्षी परिवादी के लैपटाप की पूरी कीमत मय ब्याज लौटाएं। इस आदे्श से आहत होकर विपक्षी सीआईएफ कम्प्यूटर्स ने राज्य आयोग,  शिमला के समक्ष प्रथम अपील दाखिल कर दी।

राज्य आयोग ने प्रकरण की विस्तृत सुनावायी की। परिवादी का कथन था कि दिनांक 29.08.2008 को उसने अपीलार्थी को रुपए 12744 दिए, लैपटाप 46280 रुपए का था, शेष रकम 33536 रुपए बजाज एलायंज द्वारा लोन पर चुकता की गई बावजूद इसके अपीलार्थी मेसर्स सीआईएफ कम्प्यूटर्स ने लैपटाप नहीं दिया।

अपीलार्थी का कथन था कि परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2 (d) (ii) के अनुसार व्यवसाय करने वाला व्यक्ति उपभोक्ता नहीं हो सकता। परिवादी कपड़े का व्यवसाय करता है और उसे व्यवसाय हेतु ही लैपटाप की जरूरत थी। परिवादी उसके शाप पर लैपटाप लेने आया जरूर था उसने जो लैपटाप पसन्द किया था वो 46280 रुपए का था। लेकिन उसके बाद परिवादी कभी उसकी शाप पर नहीं आया न ही परिवादी के पास 12744 रुपए देने का कोई प्रमाण है।

अजय वशिष्ठ (परिवादी) ने आयोग के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि विक्रेता को लैपटाप फाइनैन्स करने वाली कम्पनी बजाज एलायंज ने दि0 29.08.2008 को 33536 रुपए डीडी के जरिए दिए थे जो भुनाए जा चुके हैं। परिवादी कपड़े का व्यवसाय जरूर करता है लेकिन उस लैपटाप की जरूरत अपने एकाउंट इत्यादि व्यक्तिगत जरूरतों के लिए चाहिए था न कि व्यवसाय करने के लिए।

आयोग ने दोनों पक्षों की बातों को सुनने के पश्चात पत्रावली का अवलोकन किया और पाया कि जो विक्रेता ने इनवायस काटी है वह 46280 रुपए कीमत की है, रु0 33580 लैपटाप के लोनकर्ता कम्पनी द्वारा दिए गए हैं। लैपटाप डिलवरी का कोई साक्ष्य अपीलार्थी प्रस्तुत नहीं कर सका। अपीलार्थी ने ये तर्क भी दिया कि उसकी शाप अब बन्द हो चुकी है क्योंकि उसकी माँ कैंसर जैसी बिमारी से पीड़ित है। किन्तु आयोग ने इन सारे तर्कों को दरकिनार करते हुए परिवादी के पक्ष में फैसला सुना दिया और अपील निरस्त की दी। जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश यानि लैपटाप की पूरी कीमत 45 दिनों के अन्दर मय 9 प्रतिशत ब्याज, साथ में 3000 रुपए मुकदमे के खर्च सहित लौटाने के फैसले को कायम रखा।

वाद संख्याः 136/2016

मेसर्स सीआईएस कम्प्यूटर बनाम अजय वशिष्ठ

निस्तारितः 28.02.2017 (प्रथम अपील)

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Updated: May 1, 2017 — 12:32 pm

The Author

Ravi Srivastava

विधि व्यवसाय से तकरीबन 16 वर्षों से जुड़े रहे हैं खासकर उपभोक्ता मामलों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आपने अनेक मामलों में गुत्थियों को सुलझाया है, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े रहे हैं सरकारी सहयोग के माध्यम से निवेशकों हेतु जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित किए. अब इस मंच के जरिए दूरदराज बैठे अपने पाठ्कों को उपभोक्ता मामलों से जुड़े न्याय निर्णयन से अवगत कराना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही लक्ष्य है. वकालत के पेशे से जुड़े तमाम लोग इस पुनीत कार्य में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ हैं EMail ID- ravi_sriv@rediffmail.com, EMail ID- enquiry@consumerforumonline.in

2 Comments

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  1. इस विषय पर बेहतर वेबसाइट है।

    1. उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. उम्मीद है आपके लम्बे अनुभवों का लाभ हमें भी प्राप्त होता रहेगा.

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