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उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए न्यायों की संक्षिप्त जानकारी

सेवा में कमी पर ट्रेवेल एजेन्सी दण्डित

सुगम और सुखमय यात्रा के लिए हर कोई प्रयासरत रहता है। लेकिन कभी-कभी ये यात्रा सारे बने बनाए प्लान पर पानी फेर देती है। कुछ ऐसा ही दुर्गेश कुमार साहू के साथ भी हुआ तो उन्होंने इसकी शिकायत उपभोक्ता फोरम में कर दी परिणामस्वरूप ट्रेवेल एजेन्सी को सेवा में कमी के लिए दण्ड भुगतना पड़ा।

दुर्गेश ने भोपाल से उज्जैन तक आनलाइन तीन बस टिकट दिनांक 21.05.2016 की यात्रा के लिए बुक किए जिसके लिए उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक के नेट बैंकिंग के माध्यम से रुपए 1050 का भुगतान विपक्षी ट्रेवेल एजेन्सी को कर दिया। रवानगी की नियत तिथि पर जब बोर्डिंग प्वाइंट पर समय पूर्व सभी यात्री पहुँचे तो बस का कोई अतापता नहीं था। दुर्गेश ने एजेन्सी के पूछताछ के फोन न0 पर जब बात की तो पता चला बस कुछ देरी से पहुँचेगी। जब काफी देर तक बस नहीं आयी तो दुर्गेश ने फोन करके तीनों टिकटें निरस्त करा दीं क्योंकि यात्रा का उनका उदेद्श्य विफल हो गया था। टिकट निरस्तीकरण के बाद उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया कि टिकट का पैसा खाते में चैबिस घण्टे के भीतर भेज दिया जाएगा। लेकिन चैबिस घण्टे क्या कई दिनों बाद भी उक्त टिकटों का पैसा खाते में नहीं पहुँचा। दुर्गेश ट्रेवेल एजेन्सी का चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो गए। अन्त में हार कर उन्होंने सेवा में कमी और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का आरोप लगाते हुए ट्रेवेल कम्पनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष एक शिकायत दर्ज करा दी।

फोरम ने परिवादी के शिकायत का परीक्षण किया और पाया की शिकायत बिल्कुल सही है जबकि विपक्षी ट्रेवेल एजेन्सी ने इस बावत अपनी कोई सफायी शिकायत  के खिलाफ फोरम के सामने पे्श नहीं की। लिहाजा उपभोक्ता फोरम विपक्षी ट्रेवेल एजेन्सी को सेवा में कमी का दोषी पाते हुए उसके खिलाफ 1050 रुपए टिकट का मूल्य, 1000 रु0 मानसिक पीड़ा के व 1000 रु0 वाद व्यय के देने का आदेश पारित कर दिया साथ में ये भी कहा कि यदि इस आदेश का पालन दो माह के अन्दर नहीं किया जाता है तो विपक्षी को ये पैसा 9 प्रतिषत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाना होगा।

वाद संख्याः 630/2016

दुर्गेश कुमार साहू बनाम वर्मा ट्रेवेल्स, भोपाल

निस्तारितः 07 .01.2017

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The Author

Ravi Srivastava

विधि व्यवसाय से तकरीबन 16 वर्षों से जुड़े रहे हैं खासकर उपभोक्ता मामलों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आपने अनेक मामलों में गुत्थियों को सुलझाया है, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े रहे हैं सरकारी सहयोग के माध्यम से निवेशकों हेतु जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित किए. अब इस मंच के जरिए दूरदराज बैठे अपने पाठ्कों को उपभोक्ता मामलों से जुड़े न्याय निर्णयन से अवगत कराना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही लक्ष्य है. वकालत के पेशे से जुड़े तमाम लोग इस पुनीत कार्य में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ हैं EMail ID- ravi_sriv@rediffmail.com, EMail ID- enquiry@consumerforumonline.in

2 Comments

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  1. उपभोक्ता हित सर्वोपरि होना चाहिये

    1. जी हाँ सुधान्शु जी आपका कहना सही है.

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