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उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए न्यायों की संक्षिप्त जानकारी

आखिरकार लौटानी पड़ी अतिरिक्त राशि

किसी व्यक्ति से बने बनाए मकान को खरीदना और फिर दस्तावेजों में नामान्तरण /हस्तांतरण कराना नाकों चने चबाने जैसा है। मनमानी दरों की वसूली की जाती है। बेचारा उपभोक्ता हर तरफ से मारा जाता है। जयपुर निवासी योगेन्द्र गुप्ता ने एक ऐसे ही मामले में विपक्षी पार्टी राजस्थान स्टेट इण्डिस्ट्रीयल कार्पोरेशन लिमिटेड को अच्छा सबक सिखाया।

योगेन्द्र जी ने विपक्षी से एक व्यक्ति अरविन्द गौड़ को आबंटित प्लाट संख्याः सी-50 को विक्रय पत्र यानि सेल डीड के माध्यम से दि0 05.07.2011 को खरीद लिया और दि0 15.12.2011 को सभी औपचारिक्ता पूरी करने के बाद हस्तांतरण के लिए विपक्षी के पास जमा कर दिया। योगेन्द्र जी को विपक्षी ने चिट्ठी भेजकर बताया कि हस्तांतरण शुल्क के रूप में रुपए 1,91,964 जमा करने होंगे जबकि पहले उन्हें मात्र रु0 25,000 ही शुल्क बताया गया था। मजे की बात तो ये है कि योगेन्द्र जी के पास राजस्थान स्टेट इण्डिस्ट्रीयल कार्पोरेशन लिमिटेड का एक और प्लाट भी था जिसका हस्तांतरण उन्होंने कुछ समय पहले किया था तो शुल्क के रूप में रु0 2,4696 ही लिया गया था। बस फिर क्या था योगेन्द्र जी ने तत्काल इसकी शिकायत जिला उपभोक्ता फोरम (तृतीय), जयपुर में दर्ज करा दी।

फोरम में विपक्षी ने उपस्थित होकर कहा कि योगेन्द्र जी का प्लाट एक अचल सम्पत्ति है जिसकी सुनवाई फोरम में नहीं हो सकती। हस्तांतरण शुल्क की सूचना भी योगेन्द्र जी को बार-बार दी गई थी। लेकिन जानबूझकर इसमें विलम्ब किया गया। जो शुल्क लिया गया है वो नियमानुसार है।

फोरम ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और पाया कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के अन्य प्लाट जिसका विक्रय श्रीमती संतोष खण्डेलवाल के पक्ष में किया गया था दि0 11.05.2012 को हस्तांतरण शुल्क मात्र रु0 24696 ही लिए गए थे जबकि दि0 15.12.2012 के हस्तांतरण पर शुल्क रु0 1,91,964 लिए गए। राशि के इस अन्तर का कोई जवाब विपक्षी के पास नहीं था। जिससे अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का आरोप विपक्षी पर साबित हो गया। योगेन्द्र जी ने विपक्षी से अधिक वसूले गए 1,68,750 रु0 लौटाने की मांग की थी। जिसे फोरम ने मान लिया।

इस प्रकार योगेन्द्र जी इस केस को जीत गए। फोरम ने अपने आदेश में कहा कि विपक्षी योगेन्द्र जी को रु0 1,68,750 लौटाने के साथ-साथ मानसिक वेदना, परिवाद खर्च व परेशानी उठाने के लिए रु0 10,000 का भुगतान भी एक माह के अन्दर करे। समस्त भुगतान एक माह के भीतर न करने की स्थिति में पूरी राशि 12 फीसदी ब्याज के साथ लौटानी होगी।

 

वाद संख्याः 150/2014

योगेन्द्र गुप्ता बनाम  राजस्थान स्टेट इण्डिस्ट्रीयल कार्पोरेशन लिमिटेड

निस्तारितः 06.01.2017

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Updated: July 10, 2017 — 8:53 am

The Author

Ravi Srivastava

विधि व्यवसाय से तकरीबन 16 वर्षों से जुड़े रहे हैं खासकर उपभोक्ता मामलों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आपने अनेक मामलों में गुत्थियों को सुलझाया है, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े रहे हैं सरकारी सहयोग के माध्यम से निवेशकों हेतु जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित किए. अब इस मंच के जरिए दूरदराज बैठे अपने पाठ्कों को उपभोक्ता मामलों से जुड़े न्याय निर्णयन से अवगत कराना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही लक्ष्य है. वकालत के पेशे से जुड़े तमाम लोग इस पुनीत कार्य में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ हैं EMail ID- ravi_sriv@rediffmail.com, EMail ID- enquiry@consumerforumonline.in

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