Consumer Forum

उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए न्यायों की संक्षिप्त जानकारी

आखिरकार हार गई फाईनैन्‍स कम्‍पनी

फाईनैन्‍स कम्‍पनियों की कारगुजारी किसी से छिपी नहीं है। पब्लिक इश्‍यू जारी कर मोटी रकम इकटठा करने के बाद न लौटाने ढेर सारे मुकदमें विभिन्‍न न्‍यायालयों में चल रहे हैं। ऐसे ही एक शिकायत में जिला उपभोक्‍ता फोरम कानपुर नगर द्वारा परिवाद सं0 40/2002 में पारित निर्णय दि0 11-09-2002 के विरूद्व मफतलाल फाइनैन्‍स कम्‍पनी ने राज्‍य आयोग उ0प्र0 लखनऊ में अपील दाखिल कर दी।

मधु जैन (उपभोक्‍ता/प्रत्‍यर्थी) ने अपीलार्थी कम्‍पनी से एक-एक हजार रू के 13 एनसीडी(नॉन कन्‍वर्टेबिल्‍ डिबेन्‍चर) पबिल्‍क इश्‍यू के जरिए खरीदे थे। डिबेन्‍चर परिपक्‍व हो जाने के बाद भी कम्‍पनी ने उसका भुगतान नहीं किया। जिला फोरम कानुपर नगर ने उपभोक्‍ता मधु जैन के पक्ष में फैसला सुना दिया। फोरम ने अपने आदेश में कहा कि 13000 रू बारह फीसदी ब्‍याज व मुकदमें में होने वाले खर्च के रूप में 500 रू विपक्षी अदा करे। फोरम के फैसले से आहत कम्‍पनी ने राज्‍य आयोग, उ0प्र0 लखनऊ में अपील दायर कर दी। कम्‍पनी ने अपने दलील में कहा कि डिबेन्‍चर मुम्‍बई से जारी किए गए थे। इसलिए सुनवाई का क्षेत्राधिकार भी मुम्‍बई स्थित न्‍यायालय को है।जिला उपभोक्‍ता फोरम ने त्रुटिपूर्ण आदेश दिया है जो उसके क्षेत्राधिकार से बाहर है।

परिवादिनी ने यह बान्‍ड कंपनी के पब्लिक इश्‍यू के अंतर्गत क्रय किए थे जिसका प्रचार पूरे देश में किया जाता है। केवल मुम्‍बई से पब्लिक इश्‍यू जारी होने के कारण केवल मुम्‍बई में ही इसका क्षेत्राधिकार है, अपीलार्थी के इस कथन को स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है। परिवादिनी ने कानपुर में ही डिबेन्‍चर्स क्रय की समस्‍त कार्यवाही की है, अत: इस प्रकरण को सुनने का पूर्ण क्षेत्राधिकार जिला फोरम कानपुर नगर को है। सिक्‍योर्ड डिबेन्‍चर्स बान्‍ड में कोई व्‍यक्ति इसीलिए इन्‍वेस्‍ट करता है, क्‍योंकि उसकी परिपक्‍वता मूल्‍य निश्चित होता है और इस परिपक्‍वता मूल्‍य को कंपनी से प्राप्‍त करना डिबेन्‍चर्स होल्‍डर का अधिकार है। परिपक्‍वता अवधि पर डिबेन्‍चर्स के परिपक्‍वता मूल्‍य का भुगतान न करना कंपनी/अपीलार्थी की सेवा में कमी दर्शाता है। अपीलार्थी ने अपने कथन के समर्थन में कोई ऐसा साक्ष्‍य अपीलीय स्‍तर पर प्रस्‍तुत नहीं किया है जिससे यह सिद्ध होता हो कि परिपक्‍वता अवधि के बाद उसने तथ्‍यों से परिवादिनी को अवगत कराया हो या तथाकथित बैठक की कोई सूचना परिवादिनी को दी गई हो। अपीलार्थी का यह कथन भी स्‍वीकार योग्‍य नहीं है कि वह कंपनी द्वारा निर्धारित रू. 1200/- प्रति डिबेन्‍चर्स धनराशि देने को तैयार है, परन्‍तु उसके पास मूल अभिलेख प्राप्‍त नहीं हुए हैं। प्रश्‍न यह उठता है कि क्‍या इस संबंध में तथ्‍यों से परिवादिनी को अवगत कराया गया। समस्‍त कार्यवाही एकतरफा की गई है और परिवादिनी को इसके लिए बाध्‍य नहीं किया जा सकता है। प्रश्‍नगत डिबेन्‍चर्स सिक्‍योर्ड है, अत: परिवादिनी अपीलार्थी से परिपक्‍वता मूल्‍य प्राप्‍त करने की अधिकारिणी है। जिला मंच का निर्णय व आदेश विधिसम्‍मत है, हम उसमें हस्‍तक्षेप की कोई आवश्‍यकता नहीं पाते हैं। उपरोक्‍त विवेचना के दृष्टिगत प्रस्‍तुत अपील निरस्‍त किए जाने योग्‍य है।

 

वाद संख्या: A/2003/2459

मफत लाल फाईनैन्‍स क0 बनाम मधु जैन, किदवई नगर, कानपुर

निस्तारित: 25-01-2018

Related posts:

Updated: March 4, 2018 — 8:38 am

The Author

Ravi Srivastava

विधि व्यवसाय से तकरीबन 16 वर्षों से जुड़े रहे हैं खासकर उपभोक्ता मामलों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आपने अनेक मामलों में गुत्थियों को सुलझाया है, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े रहे हैं सरकारी सहयोग के माध्यम से निवेशकों हेतु जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित किए. अब इस मंच के जरिए दूरदराज बैठे अपने पाठ्कों को उपभोक्ता मामलों से जुड़े न्याय निर्णयन से अवगत कराना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही लक्ष्य है. वकालत के पेशे से जुड़े तमाम लोग इस पुनीत कार्य में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ हैं EMail ID- ravi_sriv@rediffmail.com, EMail ID- enquiry@consumerforumonline.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Consumer Forum © 2017 Consumer Forum Online