Consumer Forum

उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए न्यायों की संक्षिप्त जानकारी

टिकट निरस्तीकरण में लापरवाही पर रेलवे को देना पड़ा हर्जाना

यात्रा समय से पूर्व ही ऑनलाइन टिकट के निरस्तीकरण में लापरवाही बरतने को उपभोक्ता न्यायालय, प्रयागराज ने सेवा में कमी मानते हुए रेलवे और आईआरसीटीसी पर जुर्माना लगा दिया।

अधिवक्ता रवि श्रीवास्तव द्वारा एक ऑनलाइन स्लिपर क्लॉस का रेलवे टिकट इलाहाबाद से भाटापारा के लिए दि0 29-06-2014 को नौतनवां-दुर्ग एक्स0 में बुक किया था। जिसका भुगतान 322 रुपए उन्होंने अपने क्रेडिट कार्ड से किया था। लेकिन किसी कारण यात्रा स्थगित करनी पड़ गई। इलाहाबाद से ट्रेन का प्रस्थान समय रात्रि 22-55 बजे था जबकि यात्री ने अपना आनलाइन टिकट कैंसिल कराने हेतु 21-23 बजे नियमानुसार टीडीआर फाइल कर दिया। कुछ समय बाद पता चला कि आईआरसीटीसी ने टीडीआर यानी टिकट डिपॉजिट रिसिप्ट को यह कहकर निरस्त कर दिया कि आप द्वारा यात्रा समय के बाद टीडीआर फाइल किया गया है।

रवि जी ने तत्काल आईआरसीटीसी के हेल्प लाइन नम्बर पर बात की साथ ही एक ईमेल भी इस बावत की। जवाब में आईआरसीटीसी के अधिकारी ने यही बताया कि टीडीआर ट्रेन प्रस्थान के बाद दाखिल किया गया है।

अपना आईआरसीटीसी खाता चेक करने के बाद रवि जी को ये पता चल गया कि टीडीआर समय से दाखिल किया गया था। रेलवे ने गलत सूचना उपलब्ध करायी। लीगल नोटिस देने के बाद उपभोक्ता न्यायालय प्रयागराज में परिवाद दर्ज करा दिया। रेलवे की तरफ से कोर्ट में कोई हाजिर नहीं हुआ जबकि आईआरसीटीसी ने अपने जवाब में बताया कि वह केवल सेवा शुल्क लेता है बाकी पैसा रेलवे को दे दिया जाता है। परिवादी को पैसा रेलवे से लेना चाहिए। शिकायतकर्ता रवि जी का तर्क था कि उनका एकाउंट आईआरसीटीसी पर बना है, टिकट भी इसी एकाउंट से बुक किया गया और जो भुगतान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किया गया उसके स्टैटमैंट पर भी आईआरसीटीसी ही लिखकर आया है लिहाजा पैसा लौटाने का दायित्व आईआरसीटीसी का है।

फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ये पाया कि विपक्षीगणों ने परिवादी के टिकट निरस्तीकरण में नियमों की अनदेखी की गई जो सेवा में कमी है। फोरम ने विपक्षीगणों को आदेश दिया कि दो माह कि अन्दर नियमानुसार टिकट की धनराशि व वाद व्यय तथा मानसिक पीड़ा के 500-500 रुपए का भुगतान करें। यदि दो माह के अन्दर ये भुगतान नहीं किया जाता है तो दावा प्रस्तुतिकरण से संतुष्टिकरण तक 8 फीसदी ब्याज के साथ धनराशि लौटानी होगी।

रवि श्रीवास्तव बनाम डीआरएम, इलाहाबाद

वाद सं0- 276 सन् 2016

निर्णीत- 07.06.19

Related posts:

The Author

Ravi Srivastava

विधि व्यवसाय से तकरीबन 16 वर्षों से जुड़े रहे हैं खासकर उपभोक्ता मामलों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आपने अनेक मामलों में गुत्थियों को सुलझाया है, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े रहे हैं सरकारी सहयोग के माध्यम से निवेशकों हेतु जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित किए. अब इस मंच के जरिए दूरदराज बैठे अपने पाठ्कों को उपभोक्ता मामलों से जुड़े न्याय निर्णयन से अवगत कराना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही लक्ष्य है. वकालत के पेशे से जुड़े तमाम लोग इस पुनीत कार्य में बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ हैं EMail ID- ravi_sriv@rediffmail.com, EMail ID- enquiry@consumerforumonline.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Consumer Forum © 2017 Consumer Forum Online